सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी, वेतनमान को लेकर 22 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी धरने का ऐलान
उत्तर प्रदेश के बी-पैक्स में कार्यरत कैडर/नॉन-कैडर सचिवों, लिपिकों, विक्रेताओं और अन्य कर्मचारियों ने राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों की भांति वेतनमान और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी।

सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी: वेतनमान और सुविधाओं को लेकर 22 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी धरने का ऐलान
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (बी-पैक्स) में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी वर्षों पुरानी वेतन संबंधी लंबित मांगों को लेकर शासन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का बिगुल फूंक दिया है। 'साधन समिति सचिव परिषद, उत्तर प्रदेश' ने राज्य सरकार और सहकारिता विभाग को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के कर्मचारी आगामी 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
किन-किन कर्मचारियों से जुड़ी है यह मांग?
साधन समिति सचिव परिषद के पदाधिकारियों के अनुसार, बी-पैक्स और सहकारी समितियों में कार्यरत निम्नलिखित श्रेणी के कर्मचारी लंबे समय से कम वेतन और अनिश्चितता के माहौल में कार्य करने को मजबूर हैं:
कैडर सचिव एवं नॉन-कैडर सचिव
प्रभारी सचिव व आंकिक (Accountant)
लिपिक (Clerk) एवं विक्रेता (Salesman)
सहयोगी एवं चौकीदार (Security/Support Staff)
मुख्य मांगें: शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों के समान मिले दर्जा
परिषद ने शासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगों का मांग-पत्र प्रस्तुत किया है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
समान वेतनमान (Pay Scale): बी-पैक्स के समस्त कर्मचारियों को राज्य सरकार के अन्य विभागों के कर्मचारियों तथा बेसिक/माध्यमिक शिक्षकों की भांति नियमित वेतनमान (Pay Scale) और महंगाई भत्ता (DA) प्रदान किया जाए।
सेवा सुरक्षा व पेंशन सुविधाएं: कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा (Job Security), भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
कैडर व्यवस्था में सुधार: कैडर और नॉन-कैडर सचिवों के पदोन्नति के रास्तों को सुगम बनाया जाए और खाली पड़े पदों पर समायोजन की प्रक्रिया पूरी की जाए।
22 अक्टूबर से आर-पार की लड़ाई की तैयारी
साधन समिति सचिव परिषद के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण विकास, खाद-बीज वितरण और किसानों को ऋण उपलब्ध कराने में बी-पैक्स कर्मचारियों की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। इसके बावजूद, उन्हें उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
परिषद के प्रांतीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि 21 अक्टूबर तक शासन स्तर पर वार्ता के जरिए मांगों का समाधान नहीं निकला, तो 22 अक्टूबर से लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर सहकारी समितियों के कामकाज को ठप्प कर पूर्ण तालाबंदी और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। इस चेतावनी के बाद सहकारिता विभाग और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।




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