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चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान: पूरे देश में SIR की प्रक्रिया तेज, जानिए नियम और प्रभाव

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया जा रहा है; उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बूथ स्तर पर बीएलओ (BLO) कर रहे हैं भौतिक सत्यापन।

विद्रोही आनंद डेस्क
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चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान: पूरे देश में SIR की प्रक्रिया तेज, जानिए नियम और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली / लखनऊ: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने पूरे देश में मतदाता सूची को पूर्णतः पारदर्शी, सटीक और अद्यतन (Updated) बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान शुरू किया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि या दोहराव (Duplicate/Fake Entries) न रहे, इसे सुनिश्चित करने के लिए यह संवैधानिक दायित्व निभाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में SIR अभियान की रफ्तार काफी तेज कर दी गई है। जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक अधिकारी और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर-टू-डोर सत्यापन कार्य में जुटे हुए हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान जारी किए जा रहे नोटिसों और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों और आम जनता में व्यापक चर्चा और बहस देखने को मिल रही है।

क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग का एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके तहत पुरानी मतदाता सूची का पूरी तरह से पुनरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया जाता है। सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण (SSR) की तुलना में SIR अधिक विस्तृत होता है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित बिंदुओं को सुनिश्चित करना है:

  1. पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना: 1 जनवरी की अर्हता तिथि के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ना।

  2. स्थायी रूप से स्थानांतरित या मृतक मतदाताओं का नाम हटाना: ऐसे मतदाता जो संबंधित पते से स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनका नाम सूची से हटाना।

  3. अभिलेखों और विवरणों में संशोधन: मतदाताओं के नाम, पिता/पति के नाम, आयु, पते, फोटो या बूथ आवंटन में मौजूद लिपिकीय त्रुटियों को दूर करना।

  4. मैपिंग और सिस्टम मैचिंग: पिछले SIR अभिलेखों और ECINET डेटाबेस के साथ वर्तमान डेटा का मिलान करना ताकि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाया जा सके।

उत्तर प्रदेश में अभियान की प्रगति

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में SIR प्रक्रिया युद्धस्तर पर संचालित हो रही है।

प्रदेश भर के 91 हजार से अधिक बूथों पर 100% सत्यापन का काम पूरा कर लिया गया है। अंबेडकरनगर, अमरोहा, फतेहपुर और गोरखपुर जैसे जिलों में जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा लगातार इस प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से आवेदन स्वीकार कर रहे हैं ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

SIR के तहत नोटिस और सत्यापन पर क्यों बनी चर्चा?

हाल ही में दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद विभिन्न श्रेणियों के तहत मतदाताओं को सिस्टम-जनरेटेड नोटिस जारी किए गए हैं।

  • असंगति और मिसमैच (Discrepancies): पिछले वर्षों के अभिलेखों के साथ विवरण न मिलने (Unmapped entries) या पते में भिन्नता होने के कारण आयोग की डिजिटल प्रणाली (ECINET) द्वारा स्वतः नोटिस जारी हो रहे हैं।

  • विपक्ष की आपत्तियां: विभिन्न राजनीतिक दलों और विपक्षी संगठनों ने नोटिसों की संख्या और सत्यापन की गति को लेकर सवाल उठाए हैं।

  • चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: आयोग और संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है। किसी भी नागरिक का नाम बिना कारण या बिना जवाब देने का अवसर दिए सूची से नहीं हटाया जाएगा। जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हुए हैं, वे अपने आवश्यक दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र आदि) बीएलओ या ईआरओ (ERO) कार्यालय में जमा कराकर अपना विवरण अद्यतन करवा सकते हैं।

नागरिक और मतदाता सूची में अपना नाम कैसे जांचें?

यदि आप भी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपका नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज है या नहीं, तो चुनाव आयोग ने इसके लिए अत्यंत सरल व्यवस्था बनाई है:

  1. Voter Helpline App: चुनाव आयोग का आधिकारिक मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड करें और अपना नाम खोजें।

  2. राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (Voter Service Portal): voters.eci.gov.in पर जाकर अपने नाम, EPIC नंबर (वोटर आईडी कार्ड नंबर) या पंजीकृत मोबाइल नंबर के जरिए विवरण की जांच करें।

  3. टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: नागरिक अपने जिले के हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करके भी मतदाता सूची से संबंधित जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष और पारदर्शी लोकतंत्र की पहली शर्त है। चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान प्रत्येक नागरिक को अपने लोकतांत्रिक अधिकार को सुरक्षित करने का अवसर देता है। देश के सभी पात्र नागरिकों और मतदाताओं से अपील की जाती है कि वे इस अभियान में बीएलओ और चुनाव प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें और अपनी प्रविष्टियों की जांच समय रहते अवश्य सुनिश्चित करें।

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