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राजनीति

केरल में दस दिन के सियासी उहापोह के बाद वी.डी. सतीशन बने मुख्यमंत्री

यूडीएफ की चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद सामने आए, आखिरकार सतीशन को कमान सौंपी गई।

विद्रोही आनंद डेस्क

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, लेकिन मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर पार्टी के भीतर करीब दस दिनों तक असमंजस की स्थिति बनी रही, जिसने चुनावी जीत की खुशी को कुछ हद तक फीका कर दिया।

यह घटनाक्रम 4 मई से शुरू होकर 14 मई तक चला, जिसमें वरिष्ठ नेता वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्नीथला के नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने आए। इस देरी को लेकर पार्टी के भीतर गुटबंदी खुलकर सामने आई और मीडिया में भी इसकी खासी चर्चा रही।

लंबी खींचतान के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने वी.डी. सतीशन के नाम पर मुहर लगाई। इसके बाद 18 मई को सतीशन ने केरल के 13वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और अपनी सरकार का गठन किया।

यह पहला मौका था जब यूडीएफ को मिली स्पष्ट चुनावी जीत के बावजूद मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया इतनी लंबी खिंची। इस दौरान राज्य में प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी कुछ समय के लिए अनिश्चितता की स्थिति बनी रही, क्योंकि नई सरकार का शपथ ग्रहण लंबित रहा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस घटनाक्रम ने राज्य कांग्रेस के भीतर की गुटबंदी को खुलकर उजागर कर दिया, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अंतत: सर्वसम्मति बनाकर मामला सुलझाने का दावा किया है। आने वाले समय में मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे पर भी सबकी नज़र रहेगी।

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