सोनभद्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार की 20,000 स्वदेशी राखियां
सोनभद्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार की 20,000 स्वदेशी राखियां

सोनभद्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार की 20,000 स्वदेशी राखियां
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं ने निर्मित कीं पर्यावरण-अनुकूल राखियां, आत्मनिर्भरता की लिखी नई इबारत।
सोनभद्र (विशेष संवाददाता): रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की महिला स्वयं सहायता समूहों ने आत्मनिर्भरता और 'वोकल फॉर लोकल' की एक अनूठी मिसाल कायम की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत जिले की लगभग 150 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने मिलकर लगभग 20,000 सुंदर, पर्यावरण-अनुकूल एवं पूर्णतः स्वदेशी राखियां तैयार की हैं।
इन राखियों को बनाने में प्राकृतिक धागों, रेशमी सूत, मोतियों और पारंपरिक कलाकृतियों का प्रयोग किया गया है। स्थानीय बाजार में चीनी व प्लास्टिक की राखियों के स्थान पर इन स्वदेशी राखियों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
खबर की प्रमुख बातें:
150+ महिलाएं शामिल: सोनभद्र के विभिन्न गांवों की महिलाओं ने मिलकर निर्माण कार्य की कमान संभाली।
20,000 राखियों का उत्पादन: रिकॉर्ड संख्या में इको-फ्रेंडली राखियों का निर्माण।
प्रशासनिक सहयोग: जिलाधिकारी व जिला स्तरीय अधिकारियों ने कलाई पर राखी बांधकर अभियान का शुभारंभ किया।
आर्थिक स्वावलंबन: त्यौहार के सीजन में ग्रामीण महिलाओं को मिली सीधी और बेहतर आजीविका।
समूह की महिलाओं ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर इस जन-जागरूकता अभियान की औपचारिक शुरुआत की। अधिकारियों ने महिलाओं के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की और नागरिकों से स्थानीय स्तर पर बनी स्वदेशी राखियों को ही खरीदने की अपील की।




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