मंगलवार, 25 अगस्त 2026·
लॉगिन

विद्रोही आनंद

सत्य • निष्पक्षता • जनहित

ताज़ा अपडेट

मौसम विभाग की चेतावनी - 20 राज्यों में भारी बारिश, पंजाब के पटियाला में रेड अलर्ट - AI जनरेटेड ग्राफिक
राष्ट्रीय

मौसम विभाग की चेतावनी: 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पंजाब के पटियाला में रेड अलर्ट

गॉल टेस्ट में भारत की शानदार जीत, श्रीलंका को 165 रन से हराया - सांकेतिक चित्र 1
खेल

गॉल टेस्ट में भारत की शानदार जीत, श्रीलंका को 165 रन से हराया

RBI गवर्नर - महंगाई और कमज़ोर मानसून पर सतर्कता, आर्थिक इन्फोग्राफिक
बिजनेस

आरबीआई गवर्नर ने महंगाई और कमज़ोर मानसून को लेकर जताई सतर्कता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता - दिल्ली नेक्स्ट पहल
राज्य / शहर

दिल्ली में 'दिल्ली नेक्स्ट' पहल शुरू, तकनीक से सुलझेंगी जलभराव और ट्रैफिक जैसी समस्याएं

अगस्त 2026 में रिलीज़ होंगी ये बड़ी बॉलीवुड फिल्में - सांकेतिक चित्र 1
मनोरंजन

अगस्त 2026 में रिलीज़ होंगी ये बड़ी बॉलीवुड फिल्में

मनोरंजन

जुलाई 2026 का बॉक्स ऑफिस: धमाल 4 सबसे आगे, कुल कलेक्शन में बड़ी गिरावट

राज्य / शहर

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर, सेना और वायुसेना ने चलाया राहत अभियान

क्राइम

सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में बरी किए जाने के फैसले को बहाल किया

बिजनेस

सरकार ने 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को दी मंजूरी

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा

राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को रखा बरकरार

अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है।

विद्रोही आनंद डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मई में अपना फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति ज्योयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग की इस कवायद को बरकरार रखा।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया था कि इतने कम समय के भीतर चलाई गई यह पुनरीक्षण प्रक्रिया कई वास्तविक और पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर कर सकती है। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना था कि मतदाता सूचियों को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने के लिए ऐसी कवायद ज़रूरी है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को प्राप्त अधिकारों के अनुरूप है। पीठ ने कहा कि मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है।

हालांकि पीठ ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से न हटे, इसके लिए पर्याप्त सावधानी बरती जाए और प्रभावित लोगों को सुनवाई का उचित मौका दिया जाए।

विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समाज संगठनों ने फैसले के बाद भी सतर्क रुख अपनाया है और आगे भी इस प्रक्रिया की निगरानी जारी रखने की बात कही है, जबकि चुनाव आयोग ने इस फैसले को मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखने की दिशा में अदालत की मान्यता के तौर पर पेश किया है।

शेयर करें:WhatsAppXInstagram Stories